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August 24, 2012
कि लो बरसे हैं बादल
कि लो बरसे हैं बादल आज जमकर यूँ दरीचे से
जहाँ तक देख सकते हैं नज़र आबाद होती है|
घरों में लोग कहते हैं अजब है लुत्फ़ बारिश का,
उन्हें मालूम क्या झुग्गी मेरी बर्बाद होती है||
(...जारी है| )
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