March 05, 2013

सरकार ने सड़कों का जो बिछाया जाल यही है


सरकार ने सड़कों का जो बिछाया जाल यही है|
फोरलेनी फाइलों में दौड़ता सरपट कमाल यही है||

दंगों में कल कुछ औरतों के लूट लिये शौहर|
फिर नामे विधवा पेंशन दिया माल यही है||

अरसा हुआ सूबे में जब दबंगों का राज था|
हुक्मरां जब उतरे गुंडई में वो साल यही है||

कहते है कुछ खादी तो कुछ गाँधी कोई ड्रामा|
बचने को कानूनी नज़र से सफ़ेद ढाल यही है||

क्या ठोकरें ही हैं मेरी जिंदगी का फलसफा|
हर दर पे हूँ जो पूंछता वो सवाल यही है||